गुलाबी नगरी को भिखारी मुक्त बनाने की कवायद शुरू, जयपुर पुलिस ने की 1196 भिखारियों की प्रोफाइल तैयार

गुलाबी नगरी को भिखारी मुक्त बनाने की कवायद शुरू, जयपुर पुलिस ने की 1196 भिखारियों की प्रोफाइल तैयार*
जयपुर । सामाजिक सरोकारों के तहत जयपुर पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। पिंकसिटी को भिखारी मुक्त बनाने के लिए शहर के सभी भिखारियों को चिह्नित कर उनकी पूरी प्रोफाइल तैयार की गई है। 15 अगस्त से इन भिखारियों के पुनर्वास का काम शुरू कर दिया गया है। चिह्नित किये गये 1196 भिखारियों में से पांच ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट भी शामिल हैं। भिखारियों के स्किल के मुताबिक उन्हें काम के अवसर देने की कोशिश की जायेगी। वहीं उनके बच्चों की एजुकेशन पर भी फोकस रखा जायेगा।
कोरोना संकट के दौरान हुए लॉकडाउन में भिखारियों के जीवनयापन पर बड़ा संकट आ खड़ा हुआ था।  इस दौर में डीजीपी भूपेन्द्र सिंह यादव की नजरें भिखारियों की इस समस्या पर गईं। उन्होंने सामाजिक सरोकारों के तहत भिखारियों के पुनर्वास का जिम्मा जयपुर पुलिस को दिया। जयपुर पुलिस ने शहर को भिखारी मुक्त बनाने की दिशा में काम शुरू किया और चार अलग-अलग टीमें बनाकर गुलाबी नगरी के 1196 भिखारियों की पूरी प्रोफाइल तैयार की। 26 पाइंट के आधार पर चिन्हित किए गए भिखारियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आयु, लिंग, स्किल जैसे प्‍वाइंट शामिल किए गये।
प्रोफाइल तैयार होने पर आया कि इनमें से 5 तो यूजी और पीजी तक पढ़ाई कर चुके हैं। जबकी 193 भिखारी कक्षा एक से लेकर 12 तक की पढ़ाई कर चुके हैं और 39 साक्षर हैं। 1196 भिखारियों में 231 बेलदारी का काम जानते हैं तो 103 मजदूरी कर सकते हैं। 27 पढ़ाई का, 59 केटरिंग का, 9 कबाड़ी का, 7 होटल का, 2 झाडू पोंछा का, 9 चौकीदारी और 7 सफाई का काम जानते है। कुल भिखारियों में से 117 कोई भी काम करने के लिए तैयार हैं, जबकि 160 भिखारी ऐसे भी हैं जो कोई काम नहीं करना चाहते हैं। 12 भिखारियों के पुनर्वास के दौरान उनमें से 5 कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।इसलिये पुनर्वास का काम कुछ सुस्त पड़ा हुआ है.
*सभी अपनी मर्जी से भिक्षावृत्ति में हुए शामिल*
एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजयपाल लांबा के अनुसार ग्रेजुएट मिले पांच भिखारियों में किसी ने बीकॉम तो किसी ने एम कॉम और एमए किया है। वहीं, इनमें ग्रेजुएशन बीच में छोड़ने वाले भी शामिल हैं। हालांकि, सभी अपनी मर्जी से भिक्षावृत्ति में शामिल हुए हैं। भिखारियों के पढ़ाई किए जाने की बात सामने आने के बाद शिक्षित भिखारियों को काम के अवसर मुहैया कराने पर भी विचार चल रहा है। इसके लिये समाज कल्याण विभाग, जिला प्रशासन और एनजीओ की भी अब सहायता ली जाएगी।
*किसी भी भिखारी का क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं*
चिह्नित किए गए भिखारियों में सबसे ज्यादा 800 राजस्थान से ही हैं। जबकी 95 भिखारी उत्तर प्रदेश के हैं। जयपुर में 18 राज्यों के भिखारी मौजूद हैं। इनमें 150 दिव्यांग है तो अन्य को कोई ना कोई रोग है। पुलिस के इस अभियान में अभी तक किसी भी भिखारी का क्रिमिनल बैकग्राउण्ड सामने नहीं आया है।

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