डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए नहीं पड़ेगी इंसुलिन की जरूरत , आंखों में सुई से होगा मधुमेह का इलाज

टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए एक नई तकनीक विकसित की गई है। आंखों में इंसुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं को इंजेक्ट कर मधुमेह का इलाज किया जा सकेगा। इस तकनीक की मदद से रोज इंसुलिन की सुई लेने की जरूरत में कमी आएगी। जानवरों पर इसका परीक्षण सफल पाया गया है और अब इसका परीक्षण इंसानों पर किया जाएगा।

क्या है टाइप-1 मधुमेह : 
टाइप-2 मधुमेह जीवनशैली से संबंधित है और तब होता है जब शरीर अपर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण करता है। इस हार्मोन की कमी से रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। टाइप-1 मधुमेह प्रतिरोधी क्षमता द्वारा इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देने के कारण होता है।

ये कोशिकाएं अग्नाशय में मौजूद होती हैं। कुछ मरीजों के लिवर में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को प्रत्यारोपण कर दिया जाता है। इससे इंसुलिन की सुई लेने की जरूरत कम हो जाती है।

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