बात-बात पर थप्पड़ मार देती है पत्नी

पत्नी से पीड़ित पुरुष भी शिकायतें लेकर महिला आयोग का दरवाजा खटखटा रहे हैं। बिहार राज्य महिला आयोग और महिला हेल्पलाइन में 15-30 फीसदी शिकायतें पुरुषों द्वारा की जा रही हैं। पुरुषों की शिकायतें महिलाओं द्वारा पीड़ित करने की होती हैं, लेकिन ऐसा प्रावधान नहीं है कि पुरुषों की शिकायत सुनी जाए। कई बार सनवाई के दौरान आनेवाले पुरुष आयोग के सदस्य से पुरुष आयोग बनवाने के लिए गुहार लगाते हैं। पीड़ित महिलाओं के पति कहते हैं कि महिलाओं की बात सुनने के लिए आयोग है तो हमारे लिए क्यों नहीं। कहीं पतियों की शिकायत है कि उनकी पत्नी बात-बात पर मारपीट करती है तो किसी की पत्नी को मोबाइल से फुर्सत नहीं। कई पीड़ित पतियों का आरोप यह भी है कि पत्नी परिवार से अलग रहने का दबाव बना रही है तो किसी को कम आमदनी को लेकर ताना सुनना पड़ रहा है।

प्रताड़ना का केस दर्ज कराने की धमकी 
महिला आयोग की मानें तो कई ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें महिला ससुराल वालों पर झूठा केस दर्ज करवाती है। जांच में पता चलता है कि अपनी मनमानी न चलने के कारण पत्नियों द्वारा ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो तेजी से बदल रही जीवनशैली बड़ा कारण है। सोशल मीडिया व बाकी जगहों पर खुशी खोजने की प्रवृत्ति भी कलह का कारण बन रही है।

दीदारगंज के रहने वाले मनोज कुछ महीने पहले आयोग में आवेदन लेकर आए थे। उनका कहना था कि उनकी पत्नी उन्हें घर में बात-बात पर थप्पड़ मार देती है। और साथ ही उनके कुछ भी कहने पर आयोग में जाने की बात भी करती है। अपनी याचिका में उन्होंने दर्ज करवाया था कि पत्नी उनके परिवार वालों के साथ भी अच्छा व्यवहार नहीं करती है। इसके कारण आए दिन घर में मानसिक कलह होता रहता है।

जहानाबाद के रहने वाले विक्की कुमार ने नवंबर महीने में महिला थाने में आवेदन दिया था कि उनकी पत्नी और ससुराल वाले पैसों के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। उनकी सारी सैलरी पत्नी अपने पास रख लेती है और जब पैसे की जरूरत होती है तो उन्हें पत्नी से मांगना पड़ता है। पैसे देने से पहले पत्नी को जानकारी देनी होती है। इच्छा से न घर में पैसे दे सकते हैं और ना दोस्तों के साथ जा सकते हैं।

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