वकीलो के बारे मै भी सरकार सोचे सभी की सैलरी नहीं होती वो भी रोज़ कमाते है रोज़ खाते है

जनपद दीवानी फौजदारी एवं बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी(बोड़ाकी) व नीरज कुमार चौहान महासचिव ने बार कौंसिल आफ उ०प्र० से एक अपील की है कि यह सर्वविदित है कि उच्च न्यायालय व कुछ बड़े शहरों को छोड़ दें तो अधिवक्ता की स्थिति रोज़ कुँआ खोदकर पानी पीने की है ऐसे में गत 8 मार्च से अधिवक्ता समुदाय लगभग छुट्टी पर ही थे और अब कोरोना वायरस से बचाव के तहत 14 अप्रेल तक न्यायालय बंद रहेंगे । आगामी परिस्थितियों का अभी कुछ पता नहीं है। अधिवक्ताओं का कोई वेतन नहीं होता।आय का कोई अन्य स्रोत न होने अथवा सरकारी मदद नहीं होने के कारण कितने ही साथी आर्थिक संकट से जूझेंगे।अधिवक्ताओं के बारे में आम धारणा सरकार की अथवा अन्य आमजन की यही रहती है कि उनके परिवारों को किसी आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं होती।

बार कौसिल हमारी parential बॉडी है और अधिवक्ताओं के आर्थिक हालात बार काउंसिल के माननीय सदस्यों से छिपे नहीं हे। इसलिए संभवतः पहली बार उत्पन्न हुई इन परिस्थितियों से अधिवक्ता गणों को उबारने उनके आत्म सम्मान को संरक्षण प्रदान करने के संबंध में कोई राहत पैकेज कौसिल द्वारा अपने स्तर से या प्रदेश सरकार से अधिवक्ता साथियों को तत्काल दिलाये जाने हेतु आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण हेतु आर्थिक पैकेज अविलंब घोषित कर अग्रणीय भुमिका अदा करे। बार काउन्सिल आफ इंडिया द्वारा भी उक्त विषय मैं एक पत्र केंद्र सरकार को भी लिखा जा चुका है इस प्रकार उक्त सम्बंध मै अविलम्ब आवश्यक कार्यवाही अमल मैं लायी जायें।

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