नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष में जुबानी जंग

केरल विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर नागरिकता संशोधन कानून रद्द करने की मांग की है। बुधवार (1 जनवरी) को इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग तेज हो गई। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केंद्रीय कानून लागू करना राज्यों का संवैधानिक कर्तव्य है। वहीं, वामदल और कांग्रेस ने विधानसभा के प्रस्ताव पारित करने को सही ठहराया और भाजपा की आलोचना की।

राज्यों को कानून लागू करना होगा: कानून मंत्री ने कहा कि जो राज्य यह बात करते हैं कि वे संशोधित नागरिकता कानून को लागू नहीं करेंगे उन्हें उचित विधिक राय लेनी चाहिए। आश्चर्य की बात है कि जिन सरकारों ने संविधान की शपथ ली है वही असंवैधानिक बातें कर रही हैं। नागरिकता कानून संसद से बना है और संसद केंद्रीय सूची के तहत आने वाले विषयों पर पूरे भारत के लिए कानून बना सकती है। संविधान के अनुच्छेद 245 की उपधारा दो का उल्लेख करते हुए रविशंकर ने कहा कि राज्य संसद द्वारा पारित कानूनों का विरोध नहीं कर सकते। हर राज्य सरकार का संवैधानिक दायित्व है कि वह संविधान के प्रावधानों का पालन करे। संसद द्वारा पारित कानून के खिलाफ राज्य सरकार नहीं जा सकती।

विपक्ष का हमला
विधानसभा के पास विशेषाधिकार: विजयन केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भाजपा के विरोध को खारिज करते हुए कहा कि विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव केंद्र की ओर से पारित असंवैधानिक कानून के खिलाफ है। पूरा देश इसे देख रहा है। संसद का विशेषाधिकार हनन होने के आरोप पर उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभाओं के अपने विशेषाधिकार होते हैं और इसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

केंद्र को राज्यों की बात सुननी चाहिए: डी राजा
सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा कि केंद्र को राज्यों की बात सुननी चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि भारत एक निर्वाचित संसद और निर्वाचित विधानसभाओं वाला देश है। दोनों के बीच सहयोग होना चाहिए। कई राज्य सरकारें हैं जिनके इस मसले पर अलग विचार हैं। उन्हें सुनना चाहिए। मजबूत केंद्र और कमजोर राज्य का फार्मूला नहीं चलेगा। हमें एक मजबूत केंद्र और मजबूत राज्य की आवश्यकता है।

सवाल उठाने का अधिकार नहीं: नवाब मलिक
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि केरल विधानसभा के फैसले पर सवाल उठाने का किसी को अधिकार नहीं है। हम नागरिकता कानून के खिलाफ हैं। अधिकतर राजनीतिक दलों ने संसद और सड़क पर इसका विरोध किया है। हर विधानसभा को यह अधिकार है कि वह किसी मुद्दे पर विरोध या पक्ष में प्रस्ताव पास करे। किसी को भी विधानसभा और केरल के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।

विधानसभाओं के पास अधिकार: तुलसी कांग्रेस नेता केटीएस तुलसी ने भाजपा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव की ओर से मुख्यमंत्री के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग किए जाने पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, राज्य विधानसभा को प्रस्ताव पास करने का अधिकार है। मुझे समझ नहीं आता कि इससे कानून का उल्लंघन कहां होता है।

सीएम इस्तीफा दें: जीवीएल
भाजपा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से इस्तीफा देने की मांग की है। उन्होंने कहा, सीएए केंद्रीय कानून है जिसे संसद के दोनों सदनों ने पास किया है। यदि आप इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप संविधान का मजाक बना रहे हैं।

संविधान और संसद का अपमान: नकवी
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, संविधान में संसद और राज्य विधानसभाओं की भूमिका स्पष्ट है। संसद से पास कानून को यदि कोई राज्य विधानसभा हटाने की कोशिश करती है तो यह न केवल संविधान का बल्कि संसद का भी अपमान है।

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