डीडीए ने बढ़ाया सर्वे का कटऑफ डेट

DDA survey cutoff date extended10 फरवरी 2017 के समाचार पत्र के अनुसार  उपराज्यपाल अनिल बैजल के साथ हुई डीडीए की मासिक बैठक में DUSIB की नीति के अनुसार 1 जनवरी 2015 तक के परिवारों को परियोजना के सर्वे में शामिल किया जायेगा।
 
इसी बीच कठपुतली कॉलोनी का संघर्ष मजबूती से आगे बढ़ रहा है जिसमें वहाँ के लोग अपने विकास और विकल्पों पर रोज जनसभा में चर्चा करते हुए अपने ऊपर हो रहे डीडीए और शासन के मनमानी को एक दुसरे से साझा करते हैं। पिछले वर्ष 18 दिसम्बर, 2016 से दूसरी बार शुरू हुआ लोगों को ट्रांजिट कैंप में जबरन भेजने का सिलसिला अभी थम गया है लेकिन परियोजना में लोगों की मांगों को नजरअंदाज करने का डीडीए का रवैया अभी भी जारी है। 2009 में जब यह परियोजना कठपुतली कॉलोनी के लिए चयनित हुई थी तब से लेकर अबतक लोगों से संवाद विस्तृत तौर पर नहीं हुई है जिसके कारण लोगों का भविष्य और वर्तमान दोनों अँधेरे में है। वर्ष 2009 में बिना किसी आधार के 2800 फ्लैट बनाने की योजना पर मंजूरी देने से लेकर 2011 के डीडीए द्वारा किये सर्वे में परिवारों को छोड़ देना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। लोगों को पूरी योजना ना बताते हुए, अलग अलग करारनामा पर भारी पुलिस बल के मौजूदगी के दवाब में हस्ताक्षर करवाना इसमें दूसरी कड़ी जोड़ता है जिसके खिलाफ आज कॉलोनी के अधिकांश लोग और समाज एक होकर संघर्ष कर रहे हैं। 
 
दिनांक 08 फरवरी 2016 को कठपुतली कॉलोनी के निवासी माननीय एलजी श्री अनिल बैजल से मिलने गए थे जिसमें कठपुतली कॉलोनी के साथ हो रहे अन्याय और गड़बड़ियों को उनके साथ साझा किया। इसकी जाँच होगी ऐसा आश्वासन देने के बाद माननीय एलजी द्वारा बुलाई गयी मीटिंग में डीडीए को 1 जनवरी 2015 तक के परिवारों को परियोजना में शामिल करने का निर्देश भी एकतरफा दिखाई देता है। यह काफी सराहनीय है कि उन्होंने लोगों की मांगों को ध्यान में रखते हुए यह किया लेकिन इसके साथ ही बड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है कि, क्या सरकार लोगों के बीच पूरी परियोजना रखना नहीं चाहती, जिसमें पूरे कठपुतली कॉलोनी में लोगों को घर देने के नाम लगभग आधी जमीन व्यावसायिक उपयोग के लिए बदल कर लोगों को उनके अधिकार से वंचित करते हुए निजी बिल्डर को फायदा पंहुचा रही है और दूसरी तरफ कम जमीन होने का हवाला देते हुए 15 और उससे अधिक मंजिला बिल्डिंग में जाने के लिए मजबूर कर रही है? ऐसा ही कुछ प्रतीत होता है जब अभी लोगों के बीच इसके बारे में उनसे पूछते है और लोग अवाक सोचते है कि, क्या उनकी ही सरकार उनका जमीन छीन कर ऐसा अभूतपूर्व छलावा कर सकती है? लोगों को करारनामा में लिखी बातों की भी जानकारी खुले तौर पर ना देना, उनसे डेमोलिशन की पर्ची उन्हें बिना समझाए जबरन काटना इसका प्रमाण हैं और इसके बारे में वहाँ हो रहे जनसभा में लोगों की बातों से साफ़ पता चलता है।
 
लोगों ने जनसभा में माननीय एल.जी के द्वारा डीडीए के साथ हुई बैठक में 1 जनवरी, 2015 तक के परिवारों को योजना में सम्मिलित करने के निर्णय की सराहना करते हुए ये साफ़ जाहिर किया है कि कठपुतली कॉलोनी में कोई भी कार्य बिना लोगों के भागीदारी के अस्वीकार्य होगा और अगर 2015 तक के परिवारों को शामिल करने के लिए प्रक्रिया पर कोई नीति बनती है तो उसको अंतिम रूप देने के लिए कठपुतली कॉलोनी के लोगों से डीडीए उनके द्वारा बुलाये पुर्वसूचित जनसभा में तय करें और पूरी योजना के बारे में बताते हुए उसपर भी आपत्ति दर्ज करे। कठपुतली कॉलोनी के निवासी पिछले 52 दिनों से रोज कॉलोनी में खुले में जनसभा कर रहे है जहाँ वो अपनी बात रखते हैं और अपने ऊपर हो रहे अन्याय को साझा करते रहे है। इस पूरी प्रक्रिया से लोगों में एकता बढ़ी है और लोकतान्त्रिक मांगे मजबूत हुई है। इन सभी परिस्तिथियों के बीच हम फिर से कठपुतली पुतली के निवासियों की मांग बतलाना चाहते हैं, जो रोज हो रही लोगों की आपस में जन सभा के बीच से निकली है।
 
1)  डीडीए के एक एक करके घर तोड़ने की प्रक्रिया के चलते वहाँ की नालियों में मलबा भर गया है जिसके कारण वहाँ बहुत गंधगी फ़ैल गई है जिससे कई बीमारी होने की सम्भावनाये हैं। डीडीए को जल्द से जल्द कठपुतली कॉलोनी में घर तोड़ने से हुई गन्दगी को साफ़ करना चाहिए और जो पानी की पाइपलाइन टूट गई हैं उन्हें ठीक करना चाहिए।
2)  डीडीए अपना कैंप कठपुतली कॉलनी से जल्द से जल्द हटाये।
3)  “हम अपना विकास खुद करेंगे”, यह बात कठपुतली कॉलोनी का हर निवासी कहता है। हमें विस्थापन नहीं बस्ती का नियमितीकरण चाहिए।
4)  बस्ती के विकास और मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार को ज़रूरी कदम उठाने चाहिए।
5)  हम कठपुतली कॉलोनी के नाम सामुदायिक भूमि अधिकार की मांग करते हैं।
6)  उपरोक्त माँगों को ध्यान में रख कर डीडीए 10 दिन की पूर्व सुचना देते हुए जन सुनवाई करें, जिसमे इन सभी माँगों पर खुली चर्चा होनी चाहिए।

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