किसान आंदोलन : तीन राज्यों की पुलिस, आठ नाकेबंदी फिर भी नहीं रुके किसानों के कदम

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन शुक्रवार को और उग्र हो गया। दिल्ली- हरियाणा सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने पथराव किया और बैरीकेड तोड़ डाले। उग्र किसानों रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और पानी की बौछार करनी पड़ी, लेकिन किसानों के कदम नहीं रुके। किसान दिल्ली की तरफ बढ़ते दिखे।

सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने तीन लेयर में बैरिकेडिंग कर रखी थी। सबसे आगे कंटीले तार थे। फिर ट्रकों को बैरिकेड की तरह लगाया गया। आखिर में वॉटर कैनन तैनात थी। इतने इंतजाम भी किसानों को नहीं रोक पाए। पंजाब-हरियाणा बॉर्डर से दिल्ली बॉर्डर तक तीन राज्यों (दिल्ली, हरियाणा और पंजाब) की पुलिस ने 8 बार बड़ी नाकेबंदी कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान हर बार ट्रैक्टर के सहारे आगे बढ़ते गए। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने यहां आंसू गैस छोड़े। इससे उग्र किसानों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। किसान दिल्ली में घुसने के लिए अड़े हुए थे। कुछ किसान वहीं धरने पर बैठ गए और खाना बनाने लगे। किसानों का कहना था कि हम शांति से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसे जारी रखते हुए हम दिल्ली में एंट्री करेंगे। लोकतंत्र में प्रदर्शन की इजाजत होनी चाहिए।

पुलिस ने सड़कें खोदी फिर भी आगे बढ़े : 
किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह सड़कें खोद दी थी, लेकिन फिर भी किसान आगे बढ़ते गए। किसान खेतों के सहारे अपना रास्ता बनाते गए। पुलिस और किसानों के बीच लगातार दूसरे दिन बड़ा टकराव पानीपत में भी हुआ। बड़ी तादाद में किसान बैरिकेडिंग तोड़ते हुए दिल्ली की तरफ आगे बढ़ गए। पीछे-पीछे पंजाब के किसान भी थे। इनकी हरियाणा पुलिस से झड़प होती रही। पानीपत के सेक्टर-29 के थाने के पास पुलिस ने जेसीबी मशीन बुला ली और सड़कों को खोद दिया। कई किसान शिवा गांव के पास मेन हाईवे पर खेतों से होते हुए कई किलोमीटर लंबे बैरिकेड को पार कर दिल्ली की तरफ आगे बढ़ गए।

हरियाणा के किसानों का साथ मिला :
किसानों का हुजूम जब दिल्ली बॉर्डर के पास पहुंचा तो कमान हरियाणा के किसानों ने संभाली। पीछे-पीछे पंजाब के किसानों का जत्था आ रहा था। हरियाणा के किसानों का कहना था कि दिल्ली से सटे सिंघु बॉर्डर पर जो पुलिस तैनात है, वह हरियाणा के किसान नेताओं को जानती है। पंजाब से किसान भाई आए हैं, वो हमारे मेहमान हैं। इसलिए हम उन्हें आगे नहीं करेंगे, बल्कि पुलिस की पहली लाठी हम खाएंगे।

वेस्ट यूपी के किसान भी सड़क पर उतरे, हाईवे जाम
भाकियू के आह्वान पर शुक्रवार को मेरठ समेत वेस्ट यूपी के सभी हाईवे को किसानों ने जाम कर दिया। किसान जगह-जगह धरने पर बैठ गए। किसानों के आंदोलन के कारण मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत समेत सभी जिलों में ट्रैफिक व्यवस्था धड़ाम हो गई। शाम में किसान सिवाया टोल पर पहुंच गए। आगे की रणनीति सिवाया टोल पर पहुंच रहे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के निर्देश के तहत होगी। फिलहाल सिवाया टोल पर किसानों ने कब्जा कर टोल को फ्री कर दिया है। शनिवार की सुबह दिल्ली कूच का कार्यक्रम है।
भाकियू ने शुक्रवार को प्रदेशव्यापी हाइवे जाम करने का ऐलान किया था। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता के आह्वान के तहत मेरठ में दिल्ली-देहरादून हाइवे पर कंकरखेड़ा बाईपास में जिटौली के पास जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी के नेतृत्व में सैकड़ो किसान पहुंच गए। ट्रैक्टर-ट्राली के साथ किसान हाइवे पर धरना देकर बैठ गए। इस दौरान वाहनों का आवागमन ठप कर दिया गया। पुलिस, प्रशासन के साथ हल्की नोंक-झोंक भी हुई। दोपहर बाद किसानों को सूचना मिली कि राकेश टिकैत मुजफ्फरनगर से कूच कर गए हैं। उसके बाद जिटौली में धरना समाप्त कर किसान सिवाया टोल पर पहुंच गए। उधर, हाइवे जाम के कारण मोहिउद्दीनपुर में भी जाम लग गया। वाहनों को मोहिउद्दीनपुर-खरखौदा मार्ग से निकाला गया। अब किसान सिवाया टोल पर बैठ गए हैं। शनिवार की सुबह दिल्ली कूच का कार्यक्रम है।

बिजनौर में किसानों ने 11 स्थानों पर लगाया जाम :
भाकियू ने किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के विरोध में व कृषि बिलों को वापस लिए जाने को लेकर किसानों ने बिजनोर जिले में दिल्ली पौड़ी हाइवे पर करीब 11 बजे जाम लगा दिया। भाकियू ने जिले में 11 स्थानों पर जाम लगाया। जाम में लोगों को फंसकर परेशानी से दो चार होना पड़ा। वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पदाधिकारियों ने भी कृषि बिलों को वापस लिए जाने को लेकर जिले की पांचों तहसीलों में धरना दिया। आजाद किसान यूनियन ने भी कृषि बिलों को वापस लेने और किसानों को दिल्ली जाने से रोके जाने को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन एडीएम प्रशासन को सौंपा। किसानों का जाम अभी भी जारी है।

मुजफ्फरनगर में जाम के बाद दिल्ली कूच :
मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत के नेतृव में किसानों ने खतौली और मंसूरपुर के बीच नावला कोठी के पास करीब तीन घंटे जाम लगाया। इसके बाद वह दिल्ली के लिए कूच कर गए। वहीं, किसानों के साथ झिंझाना थाने के गाड़ी वाला चौराहे पर मेरठ करनाल हाईवे को जाम कर दिया। सुबह 11 बजे ही भाकियू जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में अनेक किसान गाड़ी वाला चौराहे पर पहुंच गए थे और उन्होंने हाईवे पर दरी बिछाकर वही बैठते हुए हाईवे को चक्का जाम कर दिया। इसके चलते हाईवे पर दोनों और कई कई किलोमीटर लंबे वाहनों की लाइन लग गई। पुलिस ने गांव के रास्तों से वाहनों को निकालने की भी व्यवस्था की मगर यह नाकाफी रही।

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