डिजिटल दुनिया में अपने बच्चे को ऐसे रखें सुरक्षित

इंटरनेट पर हमारी निर्भरता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इंटरनेट हमारे लिए जितना जरूरी है, अगली पीढ़ी के लिए उससे कहीं ज्यादा। दूसरी ओर देखा जाए तो इस दुनिया में शामिल होने के कुछ नुकसान भी हैं। इंटरनेट की दुनिया में कैसे रखें अपने बच्चे को सुरक्षित, बता रही हैं स्वाति शर्मा

भाई साहब के फोन और लैपटॉप को कोई हाथ नहीं लगा सकता। आधा व्यापार तो वे इसी के जरिये करते हैं। बुआ जी को शाही पनीर बनाना था, यू-ट्यूब खोला और सीख लिया। अब घर में शांति भी बनी रहती है। वो क्या है कि पिता जी का ज्यादा समय अब फोन में ही बीतता है और घर वालों की कमियां उन्हें कम नजर आती हैं। मम्मी भी चारदीवारी की दुनिया से इस छोटे से यंत्र के जरिए बाहर निकल अपनी सखियों से बातें कर लेती हैं। बचपन की सहेलियां बरसों बाद फिर मिल गई हैं और वॉट्सएप ग्रुप में चैटिंग होने लगी है।

पर, अरे ये क्या? जब छोटू की नेट चलाने की बारी आई तो उसे डांट कर भगा दिया। वो भी ये कहते हुए कि ये इंटरनेट उसके काम की चीज नहीं है, बड़े हो जाओ तब मिलेगा। वाह, मोहतरमा किस जमाने में जी रही हैं? ये आगे बढ़ता संसार है और इसमें इंटरनेट यदि आपके बेहद काम की चीज है तो आपके बच्चे के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। किताब में जब बच्चा इंटरनेट के इस्तेमाल के बारे में पढ़ता है तो वहां भले ही इंटरनेट के कुछ गिने-चुने इस्तेमाल ही लिखे होते हैं, लेकिन हकीकत में यह जीवन की अहम जरूरतों में से एक हो चुका है। फिर आप अपने लाडले को इससे भला कैसे दूर रख सकती हैं? आपकी चिंता अपनी जगह जायज है, लेकिन उसकी जरूरत को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। आपको उसे दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना भी तो सिखाना है। थोड़ी सतर्कता और सही, सीख देकर आप बच्चे को निश्चिंत होकर इस ई-दुनिया का हिस्सा बना सकती हैं।

हानिकारक है सिक्के का दूसरा पहलू
सुविधाओं के लाभ के साथ हानियां भी जुड़ी होती हैं। इंटरनेट के साथ भी यही बात लागू होती है और शायद यही पक्ष आपको भी चिंतित करता है। इंटरनेट हम फोन या कंप्यूटर के माध्यम से इस्तेमाल करते हैं। इससे निकलने वाली रोशनी के आगे ज्यादा देर बैठने से आंखों पर बुरा असर पड़ता है, वहीं रात में इसका इस्तेमाल नींद प्रभावित करता है। ज्यादा देर इंटरनेट के इस्तेमाल से बच्चे का खेलना-कूदना कम हो जाता है और उसके शारीरिक विकास पर असर पड़ता है। वहीं, इंटरनेट की फ्रिक्वेंसी उसके दिमाग को भी प्रभावित करती है।
उम्र के अनुसार पेश आएं
दस साल की उम्र तक के बच्चे को इंटरनेट का इस्तेमाल आप अपने सामने ही करने की अनुमति दें। यदि वो कार्टून, ई-स्टोरी या पढ़ाई से संबंधित कुछ भी इंटरनेट पर देखना चाहता है तो खुद उसके साथ बैठकर दिखाइए। ई-गेम्स खेलने में भी यह सतर्कता जरूरी है। खुद तय करें कि बच्चा किस तरह के खेल खेल सकता है। 11 से 14 साल तक के बच्चे में थोड़ी समझ विकसित हो चुकी होती है और वो सही-गलत का कुछ अंतर समझने लगते हैं। ऐसे में आपको पहले अपने बच्चे का मिजाज समझना जरूरी है। यदि वो समझदार है तो कुछ देर अपनी मर्जी से इंटरनेट चलाने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यदि आप निश्चिंत नहीं हैं तो खुद की देखरेख में ही उसे इंटरनेट का इस्तेमाल करने दें। बच्चे से इंटरनेट से जुड़ी बातें करती रहें और उनके सवालों के जवाब तलाशने में मदद करती रहें। कोई भी ऐसी परिस्थिति न खड़ी होने दें, जिससे बच्चा छिपकर इंटरनेट चलाने लगे। इससे ज्यादा उम्र के बच्चे खुद ही इंटरनेट चलाने लगते हैं, ऐसे में आप उन्हें इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के टिप्स देती रहें। साथ ही बच्चों से उनकी इंटरनेट की गतिविधियों की जानकारी लेती रहा करें, जैसे कितने दोस्त बने, आज क्या बात हुई आदि। ये भी पूछें कि बच्चे को किसी व्यक्ति से असहजता तो नहीं हो रही।

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