उपवास रखने से न सिर्फ शरीर को मिलती है नई ऊर्जा बल्कि वजन भी होता है कम

स्वस्थ और सेहतमंद शरीर के लिए लोग कई तरह की आहार प्रणाली को अपने दैनिक जीवन में अपनाते हैं। उन्हीं में से एक है ड्राई फास्टिंग। आज के समय में यह काफी ज्यादा प्रचलन में है। यह आपके शरीर को मजबूत और सेहतमंद बनाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

क्या है ड्राई फास्टिंग : 
पहले के समय में ज्यादातर लोग सूरज ढलने से पहले भोजन कर लिया करते थे और अगले दिन सूर्योदय के बाद ही कुछ खाते थे। इस तरह उनके दो भोजन के समय में लगभग 12 घंटे का अंतराल होता था। जो मानव शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता था। इस तरह का अभ्यास स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभों के कारण एक अनुशासन के रूप में सभी धर्मों में फैल गया। आज के समय में इसे ड्राई फास्टिंग के नाम से जाना जाता है।

मानसिक शांति मिलती है: 
जीवनशैली के जानकार ल्यूक कॉटिन्हो ने बताया कि ड्राई फास्टिंग मानव शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे न सिर्फ आपका शरीर मजबूत बनता है बल्कि इससे आपके मन को भी शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि वे ऐसे कई लोगों से मिल चुके हैं जिन्हें ड्राई फास्टिंग से लाभ पहुंचा है।

उन्होंने आगे बताया कि ड्राई फास्टिंग से शरीर में नई ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह वजन घटाने में भी आपकी सहायता कर सकता है और यह आपको कई बीमारियों से भी बचा सकता है। ल्यूक ने एक पुस्तक द ड्राई फास्टिंग मिरेकल फ्रॉम डिप्राइव टू थ्राइव का जिक्र करते हुए बताया कि यह पुस्तक हमें अपनी जड़ों में वापस ले जाती है और ड्राई फास्टिंग के लाभों के बारे में बताती है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे यह अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है और इसके क्या फायदे हैं। उन्होंने आगे बताया कि जल्द ही इस पुस्तक का दूसरा संस्करण भी प्रकाशित हो सकता है।

16 से 18 घंटे का उपवास दूर करेगा कई बीमारियां-
रोजाना 16-18 घंटे के उपवास से कई तरह की बीमारियां ठीक की जा सकेंगी। एक हालिया शोध में यह दावा किया गया है। द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के प्रकाशित शोध के अनुसार ऐसे उपवास से रक्तचाप कम होता है, वजन में कमी आती है और जीवनकाल भी लंबा होता है। मोटापा, कैंसर, मधुमेह और हृदयरोगों से बचाव होता है। जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और प्रोफसेर मार्क मैटसन दो तरह की इंटरमीटेंट फास्टिंग करने का सुझाव देते हैं। पहले प्रकार के उपवास में हर दिन 6 से 8 घंटे की अंतराल पर खाने और 16 से 18 घंटे तक उपवास रखने का सुझाव दिया गया है।

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