मारवाह स्टूडियो में हुआ आइसलैंड फिल्म फेस्टिवल का आयोजन

Marwah Studios Film Festival Imageबर्फ देखना और उससे खेलना किसे पसंद नही होता और जब पूरा शहर ही बर्फ का हो और यदाकदा बर्फ के तूफान आते रहे हो तो वहां रहना खतरनाक भी है और दिलचस्प भीए इसी तुफानो के बीच वहां की फिल्मे भी जबरदस्त होती  है वहां की तकनीक और स्पेशल इफेक्ट्स लाजवाब होते है जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। इसीलिए मारवाह स्टूडियो में मेने अपने स्टूडेंट्स के लिए आइसलैंड फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करवाया जिससे हमारे बच्चे विश्व भर की तकनीक को भारत में बैठे समझ सके क्योकि में चाहता हु हमारे छात्र किसी भी जगह जाकर  आसानी से काम कर सके और उन्हें सब कुछ आसानी से समझ आ जाए। यह कहना था मारवाह स्टूडियो के निदेशक संदीप मारवाह का। फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन किया आइसलैंड के एम्बैसडर थोरिर इब्सन और भूटान के फिल्म मेकर कर्मा त्शेरिंग ने। आइसलैंड के एम्बैसडर थोरिर इब्सन ने कहा की जिस प्रकार अन्य देशो में गाड़ी होना जरुरी है वैसे ही आइसलैंड में घोड़े होते है।  हमारे यहाँ के लोग काफी सीधे सरल और मेहनती होते है। इस  फेस्टिवल में हमने कुछ चुनिंदा फिल्मे चुनी है है जिनको वहां काफी सराहना मिली। इब्सन ने आगे बताया की यह फिल्मे वह की संस्कृतिए प्रकृति और मौसम को दर्शाती हुई हैए जिसमे ऑस्कर नोमिनेटिड फिल्म द डीपए पेरिस नोर्डरसिंस ए मेटलहेड और ऑफ़ हॉर्स एंड मैन शामिल है। द डीप एक व्यक्ति के बर्फ से निकलने की जीवन संघर्ष की कहानी है तो ऑफ़ हॉर्स एंड मैन आइसलैंड के लोगो और घोड़ो  के बीच समन्वय की कहानी है। इसी तरह की कई कहानिया आपको इन फिल्मो में देखने को मिलेगी और मुझे ख़ुशी है यहाँ की यहाँ के लोग फिल्म प्रेमी है उन्हें भाषा और देश से कोई लेना देना नही है वह फिल्मो को एन्जॉय करते है चाहे वो पांच साल का बच्चा हो या बूढ़ा। भूटान के फिल्म मेकर कर्मा ने कहा की भूटान में भी बॉलीवुड फिल्मो का क्रेज है और में भी यहाँ से काफी कुछ सिखने आता हु। में चाहता हु की हमारे देश के बच्चे भी यहाँ आकर यहाँ की फिल्मो और तकनीक को समझे। अंत में संदीप मारवाह ने आये हुए अतिथियों का धन्यवाद किया और उन्हें आजीवन सदस्यता प्रदान की।

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